Bhabhi Meri First Night – भाभी के हुस्न ने खड़े खड़े मुठ मरवा दिया

Bhabhi Meri First Night

दोस्तों ये घटना तब की है जब मैं अपनी भाभी के साथ घूमने के लिए मसूरी गया था. आप भी सोच रहे होंगे कि अगर भाभी ने घूमने जाना ही था तो भईया के साथ क्यों नही गयी. सही सोच रहे हैं आप सब असल में हुआ कुछ ऐसा कि भईया अपने काम में बहुत व्यस्त रहते हैं तो उनके पास इतना वक़्त नही होता कि भाभी को वक़्त दे सकें. Bhabhi Meri First Night

इसलिए जब भाभी काफी ज़्यादा बोर हो गयीं, तो उन्हें ने भईया से बोल कर मेरे साथ घूमने जाने के लिए मना लिया. फिर क्या था भैया ने हम दिनों की टिकट करा दी मसूरी के लिए और हम चल पड़े.

अब आपका ज़्यादा वक़्त न लेते हुए सीधे मसूरी पर आता हूँ कि वहां क्या क्या हुआ. कैसे भाभी ने मुझे पटा कर अपनी प्यास भुझायी. बातों बातों में आपको अपनी भाभी के बारे में बताना तो भूल ही गया. मेरी भाभी का नाम सामरीन है और उनका हुस्न बहुत ही लाजवाब है.

मैं शर्त लगा सकता हूँ कि उन्हें देख कर कोई भी खड़े खड़े मुठ मार सकता है. हर जवान और बूढ़ा उनकी गांड में अपना लंड डालने के लिए बेताब हो जाये. उनके गदराए हुए हुस्न का नक्शा 34डी डी 32 38 है. सोच सकते हैं कितनी मस्त गांड है उनकी. अब सीधे कहानी पर आता हूँ..

हमें मसूरी पहुँचते पहुँचते रात हो गई थी. हमने होटल में कमरा पहले से ही बुक करवाया हुआ था तो दिक्कत नहीं हुई. सीधे हम लोग होटल चले गये. हम लोगो ने एक ही कमरा बुक करवाया था.

तो जब हम कमरे में पहुँचे तो भाभी ने कहा कि वह नहाने के बाद खाना खाएंगी और नहाने की तैयारी करने लगी. जब वह नहाने जाने लगी तो उनका बेटा रोने लगा जोकि सिर्फ डेढ़ साल का था, जब भाभी ने उसको गोद में लिया तो बोली इसको तो बुखार हो गया है.

उन्होंने मुझे उनके बैग से उसकी दवाई लेने को कहा. मैंने दवाई उनको देदी उन्होंने मोंटी को दवा दी और दूध पिला कर सुला दिया. उसके बाद मुझसे बोल कर नहाने चली गयी. में भी टीवी देखने लगा और मोंटी के पास ही लेट गया.

जब भाभी नहा कर निकली तो क्या माल लग रही थी झीनी सी काले रंग की सिल्क नाइटी में उनको देख कर मेरा लंड मेरी पैंट में ही खड़ा हो गया. जिसे बड़ी मुश्किल से छुपा कर में भाभी को खाना आर्डर करने के लिए बोल कर नहाने चला गया.

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भाभी को ऐसे देख कर लंड तो पहले से ही खड़ा था आज उनको देख कर अलग सी कामुकता सवार हो गयी थी लंड शांत होने का नाम ही नही ले रहा था. मैंने मुठ मारने की सोची और नारियल का तेल लगा कर लंड की मालिश की फिर लंड मसलने लगा तभी मेरी नज़र भाभी की उतारी हुई ब्रा पैंटी पर पड़ी जोकि साइड में पड़ी थी.

मैंने उसे उठा कर सुंघा तो उसमें से भाभी के रसीले यौवन की महक आ रही थी लंड और ज़ोर मारने लगा. मैंने भाभी की ब्रा और पैंटी में लंड फंसा कर मुठ मरी और सारा माल भाभी की ब्रा पैंटी पर छोड़ दिया.

फिर नहा कर बहार आगया. हमने साथ में खाना खाया लेकिन जब भी भाभी कुछ प्लेट में निकलने के लिए आगे झुकती तो उनके दूध देख कर लंड अंगड़ाइयां लेने लगता. अब मेरा भाभी को देखने का नजरिया बदल सा गया था.

फिर भी मेरे मन में कुछ करने की इच्छा नही थी उनके साथ. हमदोनों ने खाना खाया और भाभी मोंटी पास सोने चली गयी थकान की वजह से और में टीवी देखने के लिए काउच पर आ गया. भाभी और मोंटी दोनों सो गए.

जब मैं टीवी देख कर सोने आया तब दोनों बेखबर सो रहे थे. और भाभी सोते हुऐ ग़ज़ब ढह रही थी. उनके शरीर का एक एक उभर निखर रहा था नाईट बल्ब की रौशनी में, उनको इस हाल में देख लंड फिर से खड़ा हो गया था मेरा.

मैंने लोअर उतार कर अपनी नेकर पहनी और एक हलकी सी टीशर्ट डाल कर लेट गया. अपने लंड को नेकर की इलास्टिक में एडजस्ट किया और सो गया जैसे तैसे. अगले दिन जब हम उठे तो भाभी मुझे देख देख कर मुस्कुरा रही थी, मैंने पूछा तो उन्होंने कुछ नही कहा. फिर हम तैयार हो कर घूमने निकल गए.

अब सीधे घटना की तरफ चलते हैं कहाँ गया किधर घुमा हमलोगों ने ये सब बात की बात है इन सब में न पड़ कर मुद्दे पर आता हूँ. हम लोग रिज घूमने न शॉपिंग करने निकले थे, हम लोग घूम ही रहे थे कि मौसम खराब होने लगा जानते ही हैं पहाडों पर बेवक़्त मौसम बिगड़ जाता है.

वहाँ के दुकानदार ने हमे बताया कि तेज़ बारिश होने वाली है तो हम होटल वापस लौट जाये. हमे भी यही सही लगा, जैसे ही हम पार्किंग की तरफ जा रह थे इतने में बारिश शुरू हो गयी. मोंटी को भीगने से बचने के चक्कर में मैं और भाभी पूरी तरह से भीग गये.

जैसे तैसे पार्किंग तक पहुँचे हमलोग और ड्राइवर को होटल चलने को बोला और होटल के लिए निकल गए. होटल पहुँचते पहुँचते भाभी को ठण्ड लगनी शुरू हो गयी थी कार में तो फिर भी ठीक था. जब होटल पहुँचे न भाभी कपडे बदल कर आई तो उन्हों ने अब लाल रंग की अर्धपार्दर्शी नाइटी पहनी हुई थी उनको देख कर मेरा हाल ख़राब हो गया.

लेकिन भाभी को अब ठण्ड और ज़्यादा लगने लगी कंबल से भी ठण्ड काम नही हो रही थी उनकी तब तक मैं भी कपडे बदल कर आ गया. भाभी कंबल के अंदर ही कांप रही थी. मैं ने एक कप चाय का आर्डर किया भाभी के लिए और उनसे बोला कुछ और होतो पहनले इसपर भाभी ने बोला की जोभी कपडे हैं उन्हें पहन कर वह कम्फ़र्टेबल नही रह पाएंगी.

तो मैंने उनको ज़ोर नही दिया उसके लिए, मैंने पूछा तब बताइये में क्या करूँ की आपको आराम मिले ठण्ड से. उन्होंने कहा कि आप मेरे कम्बल में आ जाइये न मुझे से चिपक के बैठिये. इससे आराम मिल जायेगा, उनको बातों से मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन फिर भी मैंने उनकी बात मान ली और उनकी तरफ से उनके कम्बल में घुस गया.

अभी बैठा था ही की दरवाज़े की घंटी बजी मैंने भाभी से कहा कि में आर्डर लेकर आता हूँ. मैंने दरवाज़ा खोला तो वेटर चाय लेकर आया था. चाय साइड टेबल पर रखने को बोल कर वेटर को जाने के लिए बोल दिया. और दरवाज़ा बंद कर लिया फिरसे अब में फिर से भाभी की तरफ जा कर कम्बल में घुस गया.

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भाभी अब मेरी तरफ सरक गयी हो मुझसे अपनी पीठ लगाकर बैठ गयी और मुझसे मेरा हाथ इस तरह करने को बोला की में उनको पीछे से झप्पी डाल रहा हूँ. ऐसा करने से भाभी का मक्ख़न की तरह चिकना बदन अब मेरी बाँहों में था.

उनके शरीर की मादक महक मुझे पागल करने लगी थी. मन कर रहा था अभी उनको पीछे से जकड़ कर उनकी नाइटी फाड़ डालू और उन पर टूट पड़ी. इन सब खयालो में मुझे ध्यान ही नही रहा की भाभी मेरी बाँहों में हैं.

उन्हों ने जब आवाज़ लगायी तब मुझे होश आया कि में कहाँ हूँ. उन्होंने मुझसे पूछा क्या हुआ तो मैंने कहा कुछ नही बस आपका सर टीवी न मेरे बिच आ रहा है. मेरी बात सुन कर वह हंसने लगी और बोली बस यही बात है न ?

मैंने भी कह दिया हाँ भाभी , तब वह बोलीं मेरे कंधे पर अपना चेहरा रखलो दिक्कत नही होगी. मैंने वैसा ही किया लेकिन उनकेे मुलायम और कोमल गालों का स्पर्श मुझे और ज़्यादा मदहोश करने लगा.

देखते ही देखते लंड लोअर में से हुंकारे मारने लगा. और भाभी के शरीर की गर्मी और मादक महक ने आग में घी डालने का काम किया. जिससे लंड ने एक ज़ोर का झटका मारा जोकि भाभी कमर पर पूरा पूरा महसूस हुआ होगा और भाभी को पता चला होगा.

लेकिन भाभी ने ऐसे दिखाया जैसे कुछ हुआ ही न हो लेकिन उनके चेहरे की मुस्कराहट सब बताने के लिए काफी थी. और मेरे लंड का और बुरा हाल होने लगा अब तो न सही कर सकता था और न ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे बैठ सकता था.

तभी भाभी झटके से पीछे हुई इस तरह से की मेरा लंड उनकी गांड की दरार पर ऐसे सेट हो जाये कि न उनको दिक्कत हो और न मुझे. ऐसा करने के बाद भाभी ने मुझसे कहा कि क्या हुआ आपको भी ठंड लगने लगी है क्या?

उनके इस सवाल से में सकपका सा गया और जल्दी से मुंह से क्यों भाभी निकल गया. भाभी ने कहा कि आपको नीचे कंपकंपी आ रही है. अब मेरे पास कोई जवाब नही था. तभी छोटी रोने लगा उसके दूध पीने का टाइम होगया था.

भाभी ने उसको ऐसे ही दूध पिलाने के लिए अपनी नाइटी के ऊपर के बटन खोले और मेरे सामने ही अपने चूचे निकल कर मोंटी को दूध पिलाने के लिए गोदी में ले लिया. कब मोंटी दूध पी कर सो गया तो भाभी ने मेरी तरफ देख कर कहा क्या देख रहे हैं जनाब.

में फिर रंगे हाथ पकड़ाया था अब तो कोई बहाना भी नही था बचने का. मैंने घबराहट में भाभी से पूछ लिया इसमें से दूध कैसे निकलता है? भाभी मेरा सवाल सुन कर पहले तो चुपसी हो गई फिर उन्होंने कहा कि देखो ऐसे इतना बोल कर अपना चूचा निकल कर उसकी घुंडी दबा कर दूध निकालने लगी.

मैं ये देख कर और पागल हो उठा और मुंह से निकल गया मैं भी निकल कर देखूं. इतना सुनना था कि भाभी ने मेरे हाथ अपने चूचे पर रख दिया और बोलीं बिलकुल आपभी निकल कर देखलो. मैं पहले सिर्फ घुंडी ही उंगलियों में लेकर दबा रहा था भाभी अब धीरे धीरे मचलने लगी थी मेरी बाँहों में और मेरे अंदर भी हिम्मत बढ़ने लगी थी.

मैं भी बेफिक्री के साथ उनके चूचे की घुंडी से खेल रहा था तभी मैंने मेरा दूसरा हाथ भी उनके दूसरे चूचे पर रख दिया और उसे अपने पंजो में लेकर मसलने लगा भाभी अब आह भरने लगी थी मचलने लगी थी मेरी बाँहों में अब घूम घूम कर मेरे गालों को चूमने चाटने लगी थी.

मुझसे भी नही रहा गया मैंने भी अपने होंठ उठा कर उनके होंठों पर रख दिया और उनके नीचे वाले लब को नोच नोच कर पीने चूमने लगा. भाभी अब सातवें आसमान पर थी. मेरा पूरा साथ दे रही थी. मैंने भी भाभी की नाइटी एक ही बार में ऊपर से उतार दी अब भाभी सिर्फ पैंटी में थी. “Bhabhi Meri First Night”

पागलों की तरह बेतहाशा एक दूसरे के होंठो का रसपान किये जा रह थे. भाभी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल कर मेरी जीभ खाने का प्रयास कर रही थीं. ऐसे ही चूमते चाटते मैं भाभी के चूचे मसल रहा था. मेरा ध्यान तब चुम्बन से हटा जब भाभी के गर्म दूध की एक धार मेरे मुंह पर पड़ी.

उनके गर्म दूध की धार ने पूरा स्वाद ही बदल दिया उनके होठ और जीभ का थोड़ी देर पहले जो मुझे शहद जैसा मीठा लग रहा था अब अमृत में बदल गया. लेकिन कुछ ही देर में वह स्वाद मुँह से चला गया.

अब में बेचैन था उसी स्वाद का दुबारा आंनद लेने के लिए, तभी मेरे दिमाग में आया क्यों न में दूध की धार मुँह में मार कर फिर से उनके होठों का रसपान करूँ. मैंने जल्दी से उनके चूचे को अपने मुँह की तरफ घुमाया और ज़ोर से घुंडी को दबा दिया जिससे उनके चूचे से एक दूध की धार मेरे मुंह में आ गयी.

उसे मुंह में लेकर में फिर से भाभी को होठों पर टूट पड़ा. मेरी इस हरकत से भाभी और कामुक हो उठी और मेरा भर पूर साथ देने लगीं अपने मुंह को और खोल कर अपनी जीभ मेरी जीभ से लड़ाने लगीं और खाने की कोशिश करने लगीं.

अब ये सब मेरे लंड का पारा और ज़्यादा बढ़ा रहा था. जोकि भाभी को भी चुभने लगा था अब, भाभी ने चुम्बन थोड़ा अलग हुई और मुझे सीधे होने को बोला. जब में सही हुआ तो उन्होंने मोंटी को दूसरे तरफ बेड पर सुला दिया. और अब हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे हमारे होंठ एक दूसरे से लगे थे.

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ऐसे ही थोड़ी और देर चुम्बन के बाद हम अलग हुए. एक दूसरे को देख कर हम मुस्कुरा रहे थे. एक अलग सी ख़ुशी हमारे चेहरे पर नज़र आ रही थी. तभी भाभी ने कहा कि सिर्फ किस ही कर लेते हो या और कुछ भी आता है? “Bhabhi Meri First Night”

भाभी की ये बातें सुन कर मुझे हंसी आ गयी और में भाभी के ऊपर आ गया. अब भाभी मेरे नीचे लेटी थी. मेरा लंड भाभी नाभि पर रगड़ रहा था और मेरे टट्टे उनकी चुत के ऊपर थे.

मैं अब भी नेकर और टी शर्ट में था. अब में भाभी के दाएं चूचे को अपने मुंह में भरने की कोशिश कर रहा था और ज़ोर ज़ोर से अपने होठों से दबा रहा था. मेरी जीभ उनकी घुंडी के चारो तरफ घूम रही थी.

पता नही मुझे क्या हुआ कि मुझे उनके चूचे की घुंडी को अपने मुंह के अंदर की तरफ खीचने की सूझी जीभ और तले के बीच में दबा कर ऐसा करते ही उनके चूचे से एक दूध की धार मेरे हलक तक गयी और मुझे परम आनंद का एहसास हुआ.

अब तो में ऐसे ही उनके चूचे पर टूट पड़ा. जबकि उनके बाएं चूचे को हथेली में लेकर मसल रहा था. मेरे लन्ड की रगड़ से वह और ज़्यादा मचल रही थी. जैसे मेरे स्तन मर्दन करने से हो रही उतेजना को मेरे लंड की रगड़ जैसे 10 गुना बढ़ा रही हो.

जब उनका दायां चूचा खाली हो गया तो में दूसरे पर टूट पड़ा. भाभी पागलों की तरफ मेरे बाल और पीठ सहला रही थी. कुछ देर ऐसे ही उनका दूसरा चूचा चूस के खाली करने के बाद अब में धीरे धीरे उनके शरीर के हर हिस्से को पागलों की तरह चूमने लगा. भाभी भी अब मचलती जा रही थी जैसे जैसे में नीचे सरक् रहा था.

भाभी इतनी उतेजित हो गयी की अब उन्हों ने अपने से अपना हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया. और नेकर के ऊपर से ही मासलने लगीं. फिर धीरे से उन्होंने अपना हाथ मेरी नेकर में डाल दिया इलास्टिक सरका कर लंड अब उनके मुलायम हाथों में था. जोकि इत्त्याधिक गर्म हो चूका था अब तक उनके हाथ में आते ही हुंकारे मारने लगा. “Bhabhi Meri First Night”

अब में उनकी नाभि तक आ गया था चूमते चूमते. मैंने उतेजना वश अपनी जीभ उनकी नाभि में डाल दी और उसे घुमाने लगा. भाभी कामुकता में आ गयी और ज़ोर ज़ोर से मेरे लन्ड को हाथ में लिए भींचने लगीं. मैं अब और नीचे आ गया और उनकी पैंटी को नीचे सरका कर पैरो से अलग कर दिया.

अब भाभी मदर जात नंगी पड़ी थी. अब मैंने अपने लंड को आज़ाद कर दिया अपने नेकर की कैद से. भाभी के दोनों पैरों को फैला कर उनकी चुत पर टूट पड़ा. और उनके चुत के दाने को जीभ से कभी सहलाता कभी रगड़ता कभी होठों में भर के खींचता कभी दन्त लगा देता.

मेरी इन हरकतों से भाभी की चूत पूरी की पूरी पनिया गयी थी. और भर भर कर पानी छोड़ रही थी. मैं मज़े लेलेकर उनकी चुत साफ़ करने लगा चाट चाट, उनकी चुत का पानी मुझे मंत्रमुग्ध कर रहा था.

भाभी भी अपने चरम पर बढ़ने लगी थी. उन्होंने मुझे अपनी चुत की तरफ खीँच कर चुत पर दबा दिया और बालों को मुठ्ठी में भर कर नोचने लगी. मैं समझ गया की झड़ने वाली है वह जैसे ही मैंने जीभ उनकी चुत में घुसेड़ी उन्होंने मेरे मुंह पर अपना पानी छोड़ दिया और झड़ गयीं.

मैंने उनकी चुत साफ की और उनको चुम्बन करने के लिए उनके पास गया और उनको उनकी चुत का पानी अपने चेहरे पर लगा हुआ उनको चखाया और फिर से चुम्बन मगन हो गया. “Bhabhi Meri First Night”

मैंने भाभी को चूत मर्दन कर एक बार स्खलित कर दिया था । भाभी मेरे मुंह में स्खलित हुईं थीं और अब मैं और भाभी उनको यौवन का रस पान कर रहे थे एक दूसरे से चुम्बन लिप्त हो कर।

भाभी अब और भी ज़्यादा खुल गयी थी मेरे साथ और बेहिचक मेरे शरीर का आनंन्द ले रही थी अपने हाथों के स्पर्श से, इस आनंद में भाभी ने अपना हाथ कब मेरे लंड पर रख दिया पता ही नही चला।

उतेजना के इस खेल में उनके हाथ का आभास अपने लंड पर तब हुआ जब मेरे लंड ने मुझे हुंकार मार कर अपने चरम पर पहुचने की चेतावनी दी। मैं तुरंत भाभी से अलग हुआ चुम्बन तोड़ कर , भाभी भी असमंजस में आ गयी की मुझे अचानक क्या हो गया।

उनकी प्रश्नवाचक दृष्टि और चुम्बन अलग होने की असहजता साफ़ उनके चेहरे पर दिख रही थी। मैंने उनको समझते हुए एक चुम्बन उनके होठों पर दिया और उनके निचले होठ को अपने होठ की गिरफ़्त में लेते कर दांतो से काटते हुए कहा – भाभी आपका तो पानी निकल गया लेकिन अपने अगर ऐसे ही मेरे लंड को अपने कोमल हाथों से सहलाती रहीं तो मेरा पानी अब आपके हाथ में निकल जायेगा। “Bhabhi Meri First Night”

भाभी मेरी बात सुन कर थोड़ा मुस्कुराईं और बोली, अपने प्यारे देवर का पानी में बर्बाद नही होने दूंगी ऐसे, और मुझे धक्का दे कर चित लेटा दिया उन्होंने और अब वह मेरे ऊपर थी। उनके गोलमटोल सुडौल चूचे मेरे चेहरे पर लटक रहे थे, जो कि मुझे उतेजना के चरम पर ले जा रहे थे।

तभी उन्होंने अपने हाथों से मेरे दोनों बाज़ू पकडे और मेरे मुंह पर झुक कर मुझे चुम्बन करने लगीं। उनके इस अदा ने मुझे जैसे घायल कर दिया था। मैं वैसे ही उसी अवस्था में पड़ा रहा और उन्हें मुझे चुम्बन करने का आनंद लेने लगा। अब तक मैंने जो परम सुख उनको दिया था वह उसका हिसाब बराबर कर रहीं हों मानों।

वह जब चुम्बन में मगन होती और उतेजना में अपनी स्थिरता खोती तो उनके चूचे मेरे सीने से यूं चिपकते मानों खोद कर रास्ता बना रहे हो। उनके चूचक मेरे सीने पर चुभती तो शरीर में 440 वाल्ट का करंट दौड़ने लगता। अब भाभी भी चुम्बन कर के धीरे धीरे मेरे चेहरे के अन्य भागों को चूमने चाटने लगी थी। जिससे उनकी कामुकता साफ़ झलक रही थी।

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ये इशारा था कि उनकी चुत पुनः तैयार हो रही थी यौनक्रिया का आनंद लेने के लिए। भाभी नीचे सरकते सरकते मेरे गले और सीने को बेतहाशा चूमने और चाटने लगीं थीं। फिर अचानक उनका पूरा ध्यान मेरे छोटे छोटे चुचकों पर केंद्रित हो गया हो मानों। “Bhabhi Meri First Night”

वह इस तरह उन पर टूट पड़ी जैसे कल हो ही न जो करना हो आज करलो। उनकी इस हरकत ने मेरे लंड को झंझोर कर रख दिया, जिसका पता उन्हें भी चल रहा था। जब जब भाभी मेरे चुचकों पर अपनी जीभ चलतीं या उन्हें दांतो में लेकर मसलती तो लंड स्वतः ही सलामी ठोकने लगता जो सीधे उनकी चूत से रगड़ता।

भाभी की चूत पुनः तैयार थी।उससे फिर से पानी रिसने लगा था। अब भाभी नीचे होती हुई मेरी नाभि पर जीभ फिराती मेरे लंड पर आ गयीं। उनके मुलायम और गर्म होठों का स्पर्श पाकर मेरे पुरे शरीर में कंपकंपी से दौड़ गयी।

जिसे भाभी ने महसूस किया तो मानो सातंवे आसमान पर पहुँच गयीं हों। अब उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर लंड के टोपे पर अपने होठों से चुम्बन लिया। फिर अपने मुंह में भर लिया जैसे कि कोई कुल्फी हो।

उनके मुंह की गर्मी मुझे और मेरे लंड को चरम उतेजना का आनंद दे रही थी थोड़ी देर ऐसे ही मुंह में रख कर जब भाभी ने लंड को अंदर बहार करना शुरू किया तो आनंद की मानों कोई सीमा ही न बची हो।

इस प्रकार बिना कहे कोई पहली बार मेरा लंड चूस रहा था मन तो कर रहा था क्या न करदूँ भाभी के लिए। उनके लंड चूसने के तरीके से नही लग रहा था कि वह ऐसा पहली बार कर रही हों।निपुड़ खिलाड़ी की तरह लंड चूस रही थीं। “Bhabhi Meri First Night”

जब भी वह तेज़ सी से लंड अंदर बहार करती तो अपने आप ही कमर ऊपर को चली जाती और आनंद बढ़ जाता। भाभी अब बीच बीच में अपनी जीभ से मेरे लंड के छेद को भी स्पर्श कर रही थीं और जीभ इसप्रकार चला रहीं थी छेद पर मानों पूरा लंड निचोड़ लेंगी।

जैसे जैसे वह अपना मुंह मेरे लंड पर चला रही थीं अब मैं चरमोत्कर्ष की तरह बढ़ रहा था, तभी उन्होंने अपने मुंह मेरे लंड से हटा लिया और मेरे लंड के नीचे लटक रहे टाट्टों पर जीभ घुमाने लगीं।

मेरी उतेजना का ठिकाना नही था अब की तभी कुछ ऐसा किया उन्होंने जिसकी आशंका मुझे नही थी। उन्होंने मेरे टाट्टों को अपने मुंह में भर लिया और इस तरह चुभलाने लगीं की मेरी तो जान ही निकल रही थी।

उनके इस उपहार ने मुझे उनका कृतग्य बना दिया था। कुछ देर ऐसे ही टाट्टों को चूसने के बाद वापस लंड मुंह में लेकर चूसने लगीं। लेकिन अब वह साथ ही मेरे टाट्टों को भी अपने हाथों से प्यार से सहला रही थीं।

उनका ये प्यार मुझे मेरे चरम पर ले आया और जब में स्खलन के नज़दीक पंहुचा तो मैने भाभी से कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ उन्होंने मेरी बात को सुना अनसुना कर दिया और अब और ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लगीं मानों कोई फ्रूटी में स्ट्रॉ डाल कर चूस रहा हो।

कुछ ही शनो में मैं उनके मुलायम होठों की रगड़ और उनके मुंह की गर्मी से उनके मुंह में ही स्खलित हो गया और उन्होंने मेरे लंड से निकलने वाले मेरे वीर्य की एक एक बूंद गटक ली। “Bhabhi Meri First Night”

अब में उनके मुंह में झाड़ चूका था और उनके मुंह की गर्मी ने मेरे लंड को ढीला कर दिया था । भाभी फिर भी मेरे लंड को यूँ ही चुस्ती रहीं और मेरे टाट्टों से खेलती और सहलाती रहती।

कभी जब वह ज़्यादा उतेजित होती तो मेरे लंड को हलके हलके दांतो से काटने लगती उनकी इन सब हरकतों ने धीरे धीरे कुछ ही देर में फिर से उतेजित कर दिया, और एक बार फिर से मेरा लंड अपना आकार लेने लगा। भाभी के इस तरह से मेरा लंड चूसने और चाटने से मेरा लंड एक बार फिर से पूरी तरह से तैयार था।

अब भाभी ने देर न करते हुए मुझे पलट कर अपने ऊपर खींच लिया। अब भाभी मेरे नीचे लेटी थीं और मैं उनके ऊपर था, मेरे ऊपर अब उनके दूध से शरीर को देख कर मदहोशी सी छा रही थी।

मैंने सब कुछ भूल कर भाभी को फिर से चूमना शुरू कर दिया। अब मैं भाभी के होठों को अपने मुंह में लेकर फिर से चूमने लगा और अपनी जीभ उनके मुंह में पेल कर उनकी जीभ को चूसने लगा।

मेरे चुम्बन का भाभी पर अलग ही असर हुआ , भाभी अब पहले से भी ज़्यादा कामुक हो गईं थीं। अब वह अपनी कमर उठा उठा कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी जैसे कि लंड न मिला तो पागल हो जाएंगी। “Bhabhi Meri First Night”

मैंने भी अब भाभी को छेड़ने की सोची और अपने लंड को उनकी चूत से दूर कर देता जब भी वह अपनी चूत लिंगमुंड से लगा कर रगड़ती। भाभी मेरी इस हरकत से झुंझला उठी और उन्होंने चुम्बन से अलग होते हुए मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया.

और अपनी चूत पर सेट करते हुए अंदर लेने की कोशिश करने लगीं। मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था। मैं भी अपने लंड को पीछे कर लेता, जब भाभी से बर्दाश्त न हुआ तो उन्होंने जोर से मेरे निचले होठों को मुंह में लेकर दांत चुभा दिए जिससे मुझे काफी दर्द हुआ और होंठ पर जहाँ उन्होंने दांत लगाये थे, वहां से खून आ गया थोड़ा सा.

मैंने भी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए अपना लंड एक ही बार में उनकी चूत के अंदर घुसा दिया। भाभी का ज़ोर का झटका लगा, मेरे इस वार से जिसकी भाभी को उम्मीद नहीं थी। भाभी के मुंह से एक ज़ोर की चीख निकली और आंख से आंसू आ गए।

मुझे अंदर से थोड़ा बुरा लगा लेकिन हूँ तो एक मर्द ही न लंड पर गर्व भी महसूस हुआ कि एक शादीशुदा औरत की चीख निकल दी लंड डाल कर। मैं अब भाभी को संभालते हुए थोड़ा सा ठहर गया और भाभी को फिर से अपने आगोश में लेकर चुम्बनबद्ध हो गया।

जब भाभी भी फिर से मेरे चुम्बन का प्रतिउत्तर देने लगीं तो मैने फिर से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। भाभी अब मेरे हलके हलके धक्कों का पूरा सहयोग कर रहीं थीं अपनी कमर उचका उचका कर। “Bhabhi Meri First Night”

जोकि उनके आनंद को दर्शा रहा था। भाभी थोड़ी थोड़ी देर में अपने हाथों को पीठ पर सहला रही थी मानो हर धक्के का आनंद ले रहीं हो। जब भी में अपने लंड को उनकी गहराई में उतरता तो भाभी के मुंह से एक हलकी सी सिसकी आहः के रूप में आती।

मैं भी भाभी की चूत का पूरा आनंद उठा रहा था। भाभी की चूत की गर्मी और योंकि की कसावट मेरे लंड को एक अलग ही आनंद दे रही थी। जब मैं लंड को चूत में पूरा घुसता तो उनकी चूत मेरे लंड को ऐसे गिरफ्त में ले लेती जैसे छोड़ना ही न हो और जैसे ही में पीछे खींचता अपने लंड को चूत प्पः की आवाज़ के साथ लंड को बाहर की ओर भेजती।

ऐसे ही धक्के लगाते हुए 10 मिनट हो गए और भाभी की चूत में कसावट और ज़्यादा बढ़ गयी जिसका मतलब था कि भाभी अपने स्खलन की तरफ बढ़ रही है। मैंने भी भाभी को उनके स्खलन का एक अलग ही आनंद दिलाने की ठानी और अब मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ धक्के मारने लगा।

बीच बीच में मैं अपने लंड को चूत से पूरा बाहर निकल कर एक झटके में ही अन्दर घुसा देता था। मेरी इस हरकत से भाभी और तेज़ सियाकियां लेती। जो मुझे और भी आनंद देता। इसी प्रकार जब भाभी की गिरफ्त और बढ़ने लगी मेरे लंड और मेरी पीठ पर तो मैने भी झटकों की गति और बढ़ा दी। “Bhabhi Meri First Night”

भाभी अपनी पूरी ताकत से करम ऊपर लती और पुरे ज़ोर से मेरे लंड को अपनी चूत में घुसा लेती। उनकी इस अदा पर मेरा मर मिटने का जी चाह रहा था। अब भाभी अपने स्खलन के चरम पर थी और दो तीन धक्कों में ही भाभी ढेर हो गईं।

मैंने भी भाभी के स्खलन का सम्मान करते हुए अपने धक्के धीरे धीरे काम किये उनके काम रास की स्खलन की गति के हिसाब से और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में कास के जकड़ लिया मानों मेरे अन्दर समां जाना चाहती हों।

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फिर जब उनकी सांसे सम्भली और वह अपने होश में आईं तो उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे चूमना शुरू कर दिया और ज़ोर से अपने से दबा कर पीठ पर हाथ सहलाने लगीं। उनके इस तरह से मुझे प्यार करने की वजह से मेरी नज़र उनकी नज़र से टकरा ही गयी और उन्होंने धीरे से इशारा से धन्यवाद् कहा। अब तक वह अपने को संभाल चुकी थीं।

अब मैंने फिर से धक्के मारने शुरू कर दिया लेकिन लेटे लेटे भाभी को चोदते हुए थाल गया था तो मैंने अपनी पोजीशन बदलने की सोची और भाभी की चूत से अपना लंड निकाल लिया। भाभी समझ नही पायी की में क्या चाहता हूँ तो उन्होंने पूछा क्या हुआ।

मैंने कहा कुछ नही बस ऐसे करते करते थक गया मज़ा नही आ रहा ऐसे। तो भाभी ने पूछा तो कैसे करोगे तब। मैंने भाभी को खींचा और बिस्तर के कोने पर ले आया। उन्हें कमर उठाने को बोल कर उनकी कमर के नीचे तकिये लगा दिए दो।अब भाभी कुछ ऊँची हो गयी थीं।

मैंने भाभी के पैरों को पकड़ा और एक को उठा कर अपने कंधे पर रख दिया और दूसरे को फैला कर अपनी कमर के पीछे कर दिया। भाभी की चूत अब पहले से ज़्यादा फ़ैल गयी थी। भाभी को भी अब मज़ा आ रहा था चुदने में मुझसे। और जब में धक्के लगता तो मेरे टट्टे उनकी गांड पर लड़ते तो एक अलग ही आनंद का अनुभव होता। “Bhabhi Meri First Night”

अब मैं जोश में आकर भाभी की चूत बहुत बुरी तरह से चोद रहा था। भाभी फिर से सिसकियाँ लेने लगीं थी। मेरे झटकों के साथ मैं भी अपने स्खलन की तरफ बढ़ने लगा था। जैसे जैसे मैं झटके बढ़ा रहा था भाभी की चूत फिर से और कसने लगी थी।

ये भाभी का तीसरा स्खलन था। भाभी अब पूरी तरह पागल हो रही थीं। और ज़ोर की आवाज़ें निकलने लगीं थीं। मेरी पीठ भाभी की उतेजना की गवाही दे रही थी। भाभी ने फिर से अपने नाख़ून मेरी पीठ में गड़ाने शुरू कर दिए थे और पूरी ताकत से मेरे लंड को अपनी चूत में रोकने की कोशिश करतीं।

उनकी चूत की कसावट और गर्मी मेरे लंड को हथियार डालने पर मजबूर कर रही थी। मेरी उत्जेजना अब चरम पर थी और उत्जेजना में आकर मैंने भाभी की टाँगों को और फैला दिया और झटको की गति बढ़ा दी।

करीब 8 से 10 झटकों में ही मैं और भाभी एक साथ झड़ने लगे। मैंने अपना वीर्य भाभी की चूत में ही झाड़ दिया मेरा और भाभी का वीर्य भाभी की चूत से रिस कर बाहर आ रहा था। भाभी इस स्खलन के बाद पूरी तरह से निढाल हो गईं थीं। मैं भी थका हुआ महसूस कर रहा था। हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को बाँहों में भरे सो गए।

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