Desi Bhabhi Garam Jism – पड़ोसन के साथ सेक्सी छेड़छाड़

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Desi Bhabhi Garam Jism

मेरा नाम मनु है मेरी उम्र 35 साल है। मैं जो कहानी आज बयां करने जा रहा हूं वो एक सच्ची कहानी है। सिर्फ नाम और जगह मैंने बदल दी है। मैं देखने में ठीक-ठाक हंू। कसरती बदन है। ये कहानी दस साल पहले की है जब मेरी उम्र 25 साल की थी। 25 साल की उम्र होने के बावजूद मैं चोदने में एक्सपर्ट था। निहायत ही बद्तमीज और बेशर्म लड़का था। Desi Bhabhi Garam Jism

औरतो, लड़कियों पर गंदी पब्तियां कसना और उनके शरीर को लेकर गंदी बातें मुंह पर कहकर छेड़ना मुझे अच्छा लगता था। खाशकर औरतो को छेड़ने में मुझे मजा आता था। पता नहीं क्यों पर औरते •ाी मेरे छेड़ने पर मुस्कुरा कर मजा लेती थी। कई दो नंबर औरतों को मैंने छेड़ कर पटाया था और उनकी चुदाई कर अपनी गर्मी शांत की थी।

वैसे •ाी मुझे थूलथूली, मोटी और बेहद •ारी-पूरी औरतो को चोदने में मजा आता है। ऐसी औरते साली बहूत बड़ी चुदास होती हैं। खैर अब मूल कहानी पर आता हूं। बात 2012 की है। मैं गांव से पटना पढाई के लिये आया था। जान पहचान की वजह से मुझे एक अच्छा मकान किराये से मिल गया था। कुछ दिन तो लॉज में बीत गये।

लेकिन चोदने की लत की वजह से मुझे मन नहीं लग रहा था। मेरे बाप ने साफ हिदायत दे रखी थी कि गांव नहीं आना है। वे मेरे चाल-चलन और चुदाई की कहानी से •ाली-•ाांति वाकिफ थे। पढने में मन नहीं लग रहा था और मुठ मारकर दिन गुजर रहे थे। ऐसे में एक दिन मैं अपने लॉज के बाहर टहल रहा था कि मेरी नजर बगल के छत पर पड़ी।

वहां एक औरत छत पर घूम रही थी। नीचे से जैसे ही मुझे वो औरत दिखाई दी। मेरे लंड में हलचल होने लगा। मुझे उस औरत का सिर्फ चेहरा नजर आ रहा था। मैं नीचे से सीधे अपने छत पर गया। ताकि मैं उसे ठीक से देख सकूं। मेरा और उसका छत बिल्कुल सटा हुआ था। मैं अपने छत पर अकेला था वो •ाी अपने छत पर अकेली थी।

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मैं छत से लगातर उसे घूरने लगा। उसकी उम्र तकरीबन 30 साल की होगी। देखने में मोटी और सेक्सी लग रही थी। मोटापा उसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी। उसकी खूबसूरती का दीवाना कोई •ाी हो सकता था। इतने में वो छत से नीचे ऊतर गयी। वो औरत मेरे दिलो-दिमाग पर छायी हुई थी। मैंने ठान लिया था इसके चूत को फाड़ना होगा।

मैंने छत पर ही उसके नाम की मुठ मारी और नीचे उतर गया। मेरी नींद उड़ी हुई थी। मैंने उसके बारे में पता किया। वो अपने पति और एक बच्चे के साथ रहती थी। उसका पति बाहर काम करता था। इसका मतलब था कि वो अपने घर में सिर्फ अकेले रहती थी। उसका बच्चा सुबह में स्कूल चला जाता था। उस महिला का नाम मीनू था।

अब मैं अक्सर उसके ताड़ने के चक्कर में बाहर ही रहता। वो जब •ाी घर से कही जाने के लिए निकलती मैं उसका पीछा करता था। आदत के अनुसार क ई बार उसके जिस्म को लेकर गंदी पब्तियां कसता था पर वो मुस्करा कर क ोई जवाब नहीं देती थी। मेरा हर रोज का यही काम था। वो •ाी समझ चूकी थी कि मैं उसका इंतजार करता हूं।

मीनू को •ाी मेरा छेड़ना अच्छा लगने लगा था। ये मैं समझ चूका था। मीनू का फिगर 43-36-46 था। 78 किलो की औरत थी जिसकी आंखें किसी हिरणी की तरह सुन्दर थी। वो जब •ाी पास से गुजरती थी उनकी खुशबू सूंघ कर मेरे तन बदन में वासना की आग जाग उठती थी। वो हमेशा साड़ी पहनी रहती थी।

•ारा-पूरा और गदराया-रसदार बदन होने के क ारण उसकी बड़ी-बड़ी चूचिया ब्लाउज के ऊपर से बहूत फूले हुई दिखाई देती थी। ऐसा महसूस होता था जैसे फट के बाहर आ जाएगी। वो जब सड़क पर निकलती थी तो सारे बेवडों और हरामियों का ध्यान उसी की ओर होता था।

उसकी चुचियां और मटके जैसे लगचदार गांड किसी •ाी लंड को खड़ा करने का दम •ारते थे। वो देखने से हीं चालू किस्म की लगती थी। बेहद कामूक और सेक्सी थी। क•ाी-क•ाी महसूस होता था कि वो जानबूझकर ऐसे साड़ी पहनती थी ताकि सब उसे देखे और आहें •ारें। उसका कमर मटकाकर चलने का आदत था।

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जब वो चलती थी तो उसकी मोटी गांड आपस में थूलथूला कर हिलते हुई रगड़ती थी। सच तो यह था कि उसको चोदने का सुख किसी नसीब वाले को मिल सकता था। मैंने ठान लिया था कि इसके गांड और चूत को रौंद के रहूंगा। ऐसा चोदुंगा की वो मेरे यहां से जाने के बाद •ाी मुझे नहीं •ाूल पाएगी। जब •ाी किसी और का लंड लेगी तो मेरी कमी खलेगी। बस एक मौके की तलाश थी।

छेड़ तो मैं उसे दो महीने से रहा था लेकिन बगल में होने के बावजूद उससे बात नहीं हो पा रही थी। लेकिन एक दिन मैं अपने लॉज के बाहर खड़ा कि मीनू ने मुझे आवाज दी। मुझे आश्वर्य हुआ। मैंने पूछा बोलिए क्या बात है। उसने कहा कि उसके घर के बिजली के मीटर में स्पार्किंग हो रही है। घर में क ोई नहीं हैं। क्या मैं उसे देखकर ठीक कर सकता हूं।

दोस्तो मुझे इन सबकी कोई नॉलेज नहीं थी। पर घर में घूसने का मौका मिल रहा था। वो •ाी घर पर अकेली थी। ऐसा मौका मैं कैसे छोड़ सकता था। मैंने उनसे कहा क्यों नहीं चलिए देख दिये देता हूं। ऐसा कहकर हमदोनों उनके घर में प्रवेश किये। प्र्र्र्र्रवेश करते वक्त मेरा सारा ध्यान उसके शरीर पर था और मेरा लंड कुलाचें मार रहा था।

हमदोनों मीटर के पास गये जहां स्पार्किं ग हो रही थी। मैने उनसे टेस्टर मांगा और टेबल मांगा ताकि मैं उक्त जगह पर पहुंच सकूं। वो टेबल और टेस्टर लेकर आयी। मैने टेबल पर खड़ा होकर मीटर देखने लगा। इस दौरान वो मेरा टेबल पकड़ी रही ताकि मैं अनबैलेंस ना हो जाऊं। मैंने टेस्टर से स्पार्किंग कर रहे तार पर दो बार ठोका और स्पार्किंग बंद हो गयी।

मैंने कहा- लिजिए ठीक हो गयी। इस तरह कहकर मुड़ा और जानबुझकर अनबैलैंस होकर उनके शरीर पर जा गिरा। इससे उनका •ाी संतुलन बिगड़ गया। मेरा दोनो हाथ उनके बड़े चुुुचियों पर चला गया। मैंने उसे दबाते हुए कहा बड़ा रसदार माल हो। वो शर्मातें हुए अपना संतुलन ठीक करने लगी। पर मैं उनकी चुचियों को जकड़ रखा था और छोड़ा नहीं था।

मीनू- छोड़ो मुझे। जाने दो। मैं चाय बनाकर लाती हूं।

मैंने कहा- जब इतना बड़ा दूध का गोदाम •ारा हुआ है तो चाय क ौन पियेगा।

मीनू- तुम बहूत हरामी किस्म के हो।

मैं- वो तो मैं हूं ही।

इतना कहने के साथ हमदोनों संतुलन बना चूके थे। वो बोली मुझे टेबल रखने दो। यह कहकर उसने टेबल उठाया और पीछे मुड़ गयी। मैंने सोचा यही मौका है। आज नहीं तो क•ाी नहीं। मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया। मेरा खड़ा लंड उनकी गांड में कपडे के ऊपर से घुसने लगा। मीनू बोली क्या कर रहा?

मैं मीनू के गले को चूमते हुए बोला- मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मीनू मुड़ी और पीछे मुडकर मुझे घूरने लगी और हंसते हुए मेरे गाल पर प्यार से एक थप्पड़ मारी। मैने मीनू को पकड़ लिया और उनके लिप्स चूसने लगा। वो •ाी मेरा साथ देने लगी। मीनू ने कहा-यहां सब करोगे। कमरे में चलो।

हमदोनों कमरे में पहुंचे। मैंने मीनू को बेड पर पटककर पूरी तरह से नंगी कर दिया। मेरे अंदर हवस की आग •ाड़क रही थी। मीनू की गददेदार और मालपूआ के जैसी फूली हुई चूत को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैंने उसे पलटने को कहा। उसकी मटकेदार करीने से गढी हुई बेहद विशाल गोरी गांड को देखकर मेरा 10 इंच का लौड़ा सलामी ठोकने लगा।

मैने आव देखा ना ताव उसको सीधा कर उसके बाल •ारे चूत को झुक कर सूंघने लगा। पेशाब की बदबू आ रही थी लेकिन मेरे लिए वो बदबू किसी खुसबू की तरह थी। मीनू के लिए मेरे अंदर हवस पहले से थी और आज उसके चूत को सूंघकर मुझ से कंट्रोल नहीं हो रहा था।

मैने बालों से ढकी चूत के करीब उसने अपना मुंह करके जोरों से नाक से सांस खींचा। मेरी हरकत उसे अजीब लगी। मुझे चूत की महक मदहोश कर रही थी। मुझे उसके पेशाब की बदबू अच्छी लग रही थी। मैंने लगातार अपनी नाक से खींचकर जोरों से सांस ली। मैने मीनू की चूत की होंठों को उंगलियों से पकड़ते हुये कहा- बहुत ही मस्त खुशबू आ रही है तुम्हारी बुर

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यह कहकर मैने चूत के होंठों को अलग-अलग तरफ खींचा और अपनी दो उंगली उसके चूत के अंदर डाल दी। मेरे ऐसा करते ही मीनू के मुंह से चीख के साथ सिसकारी निकल गई। मैने अपनी जी•ा निकाली। मीनू के चूत से उंगली को बाहर निकाला और फिर वो उंगली को सूंघने लगा। “Desi Bhabhi Garam Jism”

साथ ही उंगली के ऊपर के हिस्से को चाटा। उंगली को अंदर-बाहर दो-तीन बार किया और उंगली पे लगे चूत-रस को चाट लिया। मेरी हरकत को मीनू ध्यान से देख रही थी। मेरी इस हरकत से उसकी चूत ज्यादा से ज्यादा गीली होती जा रही थी। मैने फिर से जी•ा निकाली और उसकी चूत की झांटों से •ारे बाहरी •ााग को चाटने लगा।

मेरा ये अंदाज मीनू को बहूत •ाा रहा था। वो गांड उछाल के मजे ले रही थी। बाल ज्यादा होने की वजह से मुझे थोड़ी-थोड़ी देर में वहां से बाल टूटकर मेरे मुंह में आ जा रहे थे। मैं मुंह से बाल निकाल देता था और फिर से चाटने लगता था। मीनू की चूत के अंदर इतना ज्यादा पानी हो गया था की वो क•ाी •ाी छलक के बाहर आ सकता था।

मैं चूत चूसते हुए उसके बड़े चूचियों को हथेलियों में जकड़ लिया और कस कर दबा दिया। वो सिसकारी •ार कर शांत हो गयी। मेरी इस हरकत ने उसका मजा दूना कर दिया। ऐसे करते करते मैंने उसी तरह अपना पूरा कपड़ा खोल दिया। मैने 10 इंच का काला लंड उठाकर मीनू के मुंह के सामने कर दिया।

मीनू की तो हलक में सांस ही अटक गयी। वो अपने मुंह के अंदर थूक निगले जा रही थी। वो मेरे •ायंकर काले लंड को आंखे फाड़ कर देखे जा रही थी। मेरे लंड को देखकर वो क ांप उठी। मीनू-बाप रे..कितना बड़ा लंड है तुम्हारा। अगर मेरी चूत में घुस गया तो पूरी बित्ते •ार की फैला देगा एक ही बार मे चोद चोद कर पूरा •ोसड़ा बन जाएगी मेरी चूत। एक बार छु के देखती हंू।

मीनू पूरी तरह से गरम होकर चुदासी हो चुकी थी। वो चूत की गर्मी के वशी •ाूत हो चुकी थी। लंड की चमड़ी उपर नीचे करते हुए जब उसके हाथ दर्द करने लगे तो उसने डरते हुए लंड का टोपा अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी। मीनू को लंड चूसना इतना अच्छा लगा कि वो उसमे ही खो गयी। आंखे बंद कर के चुस्ती गयी। “Desi Bhabhi Garam Jism”

मैंने कहा- ऐसे ही मत चूसो.

मीनू–तो फिर… कैसे चूसू.

मैं-मुझे गंदी गंदी बाते बहुत पसंद हैं।

मीनू–ठीक है.

मैं-पहला सवाल…. कितने साल की थी जब तुम्हारे सीने मे चुचि निकलना शुरू हुई…

मीनू–मुझे याद नही…

मैं-हुउऊ…..और दबा दबा कर मसलने लायक कब हुई चुचिया तुम्हारी.

मीनू–17 साल में.

मैं-पूरा बोलो…

मीनू–जब मैं 17 साल की हुई तब तक मेरी चुचिया खूब दबाने और मसलने लायक हो गयी थी.

मैं-अब अपनी बुर के बारे मे बताओ मुझे…

मीनू–क्या…

मै-यही कि वो कहां है….कैसी है…चिकनी है या उस पर झांते हैं….

मीनू–मेरी दोनो जांघो के बीच मे मेरी बुर है….खूब फूली हुई है…और झान्टे •ाी बहुत हैं मेरी बुर में.

मैं-और बताओ…

मीनू–मेरी बुर मे दो छेद हैं….एक छेद मेरे मूतने के लिए है…और दूसरा छेद मेरी बुर को चोदने के लिए.

मैं- तुम्हारी बुर चोदने लायक है कि नही…?

मीनू–मेरी बुर खूब हचक हचक कर चोदने लायक है.

मैं-कितने लोगो ने चोदा है अब तक तेरी बुर का छेद..?

मीनू- चार लोगों ने। तुम आज पांचवे होगे। लेकिन मेरा बुर टाइट है। तू खुद मुझे चोद कर देख ले…

मैं-मेरा लंड कैसा लगा…

मीनू–बहुत सुंदर…लेकिन बहुत बड़ा है और मोटा •ाी बहुत है.

मैं- अब बताओ कि मैं अपने आधे लंड से तुम्हारी बुर चोदु की पूरा लंड घुसेड कर.

मीनू-मेरी बुर के चोदने वाले छेद मे अपना पूरा लंड घुसेड कर अच्छी तरह से चोद लो.

मैं- तो फिर आ जाओ.

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मीनू बड़े गौर से मेरे लंड को देख रही थी। मैं उसके दोनों चुचियों को दबोच लिए और उन्हे बेरहमी से मसलने लगा। मीनू—आआहह….हाअ…..ऐसे ही खूब जोर जोर से मीस मेरे दूध…… मेरी हमेशा से ख्वाहिश थी कि तू मुझे खूब बेरहमी से चोदे….खूब जोर जोर से मेरे दूध दबाए…आआआ…आआ….मसल और दबा. “Desi Bhabhi Garam Jism”

मैं— बहुत मस्त दूध है तेरे….

मीनू—आआआअहह……दर्द…हो…रहा….है…..आआआहहा.

मैं-ठीक थोड़ा धीरे धीरे दबाता हूं अब….

मीनू—नही….आआआ..मुझे दर्द मे ही मजा आता है…. मुझे ऐसे ही पूरी बेरहमी से मसल डाल ….खूब बेदर्दी से मेरी बुर को फाड़ना आज….और जोर…से….दबा…हां….ऐसे ही..उूउउइई माआ…मर….गयी….आआअहह.

मैं पूरे 10 मीनट तक मीनू की चुचियो को बेरहमी से मसलता रहा। उसकी चूचियां पूरी लाल हो गयी थी। वो चिल्लाती रही। मैं मसलता रहा। मीनू—आआअहह..अब बर्दाश्त नहीं हो रहा….मेरी बुर का •ाी उद्घाटन कर दे…..देख तेरे लंड से फटने के लिए तड़प रही है…. मैं दोनो दूध मीस्ते हुए अपना चेहरा नीचे लाया।

मीनू की दोनो जांघो के बीच। मैं देखता ही रह गया। मीनू चूदने के लिए बेचैन थी। उसने अपने दोनो हाथो से अपनी बुर की दोनो फांको को फैला फैला कर बुर दिखाने लगी। बुर की दोनो फांके आपस मे चिपकी हुई थी। बुर के अंदर लाल लाल दिखाई दे रहा था। मैने अपने लंड क ो मीनू के चूत के मुहाने पर टिका दिया।

मैं—तेल लगा लूं क्या थोड़ा मीनू—नही रे….तेल लगाने से आसानी से घुसेगा…..ज्यादा दर्द नही होगा बुर फटने का……मुझे खूब दर्द चाहिए….तू ऐसे ही सूखा सूखा घुसेड दे ……और पूरी बुर को अच्छे से फाड़ डाल की मेरी बुर चिथड़ा हो जाए….. मैने एक जोर का झटका दिया लेकिन लंड फिसल कर नीचे चला गया।

दो तीन बार डालने पर •ाी नही घुसा बहुत टाइट चूत थी मीनू की। मीनू—रुक ऐसे नही घुसेगा ……वैसे •ाी तेरा गधे का लंड है… आदमी का थोड़े ही है जो इतना जल्दी घुस जाएगा……मैं बुर की फांके फैलाती हूं….तू पूरी ताकत से धक्का लगा के घुसेड दे…. मैं—ठीक है… मीनू ने अपनी बुर की फांको को दोनो हाथो से खूब फैला दिया।

मैने एक बार फिर से बुर के छेद पर लंड टीकाया और पूरी ताकत से धक्का मार दिया। लंड बुर को चीरता हुआ तीन इंच अंदर घुस गया। मीनू की चीख निकल गयी। उसकी आंखो से आंसू बहने लगे। आंखो के आगे अंधेरा छा गया। मुझे उसकी इस हालत पर तरस आ गया। “Desi Bhabhi Garam Jism”

मैं—लंड निकाल लूं बाहर… मीनू—नही….बिल्कुल नही….तू अंदर घुसेड़ता जा और बुर फाड़ता जा बस…..तुझे मेरी कसम है जो तूने बुर को फाडे बिना लंड बाहर निकाला तो……मैं कितना •ाी दर्द से तडपू तू बुर फाड़ने से मत रुकना….बस फाड़ता जा…..फाड़ता जा…और घुसेड… मैने •ाी अब रहम की ओर सोचना छोड़ कर लगातार दो तीन तगड़े धक्के जड़ दिए बुर में।

मीनू की बुर ने खून की उल्टी कर दी। लंड बुर को ककड़ी की तरह फाड़ते हुए उनकी बच्चेदानी से जा टकराया। मीनू (जोर से)—आआआअहह….माआआ…..मर…गयी……आआआआआअ…….आआआआआआआअऔर वो चिल्लाते हुए बेहोश हो गयी। मैने जल्दी से पास मे रखे जग से उनके चेहरे पर पानी डाला जिससे वो होश मे आकर रोने लगी।

मीनू (रोते हुए)—मेरी बुर फट गयी…बहुत दर्द हो रहा है….एयाया मैं जोश में था। उसके रोने धोने से मुझे क ोई प्र्र्र•ााव नहीं हुआ। मैने दोनो चुचियो के निपल मरोड़ते हुए अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी। मीनू—आआहअ.. ऐसे ही चोद मादरचोद. मेरे दूध में दांत काट। मैं—बहुत मस्त बुर है तेरी बहनचोद। साली पूरी रांड है तू।

मीनू—तू रोज मुझे ऐसे ही चोदना। मैं तुम्हे पूरस्कार में अपनी स•ाी सहेलियो की बुर चुदवाउंगी। मैं—सच में मीनू—हां तुम सब को चोदना। सब की बुर ऐसे ही फाड़ना। मैं—आहह…..बहुत मजा है तेरी बुर मे…. लग•ाग ऐसे ही एक घंटे तक हम दोनो की पलंग तोड़ चुदाई चलती रही।

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इस दौरान मीनू चार बार झड चुकी थी। मेरा •ाी अब होने वाला था। मैं—मीनू अब मैं आने वाला हूं। मेरा अब होने वाला है…निकालु बाहर मीनू—नही अंदर ही गिरा दे अपना बीज…..कर दे मुझे ग्या•िान….मैं सं•ााल लूंगी सब…. मैं लगातार सौ के स्पीड से धक्कम पेल बुर को चोदने लगा।

मीनू पूरी मस्ता गयी थी। और फिर मेरे लंड ने मीनू की बुर को अपने पानी से •ारना चालू कर दिया। एक के बाद एक ना जाने कितनी लंबी पिचकारिया छूटने लगी। मीनू की बुर पूरी लबालब •ार गयी थी। मैं झड़ने के बाद मीनू के उपर ही लेट गया। कुछ देर हम वैसे ही शांत रहे। उसके बाद अपने शरीर की सफाई की। “Desi Bhabhi Garam Jism”

जाते-जाते मीनू ने मेरे होठो को चूसते हुए कहा कि जब तक महेंद्रू में हो मुझे अपनी बीबी समझो। तुम्हारा जब मन करे तुम मुझे चोद सकते हो। मैं चार लोगों से चूदी हूं। लेकिन तुम्हारे जैसी चुदाई मेरी किसी ने नहीं की है। आज जिंदगी में पहली बार चुदाई से संतुष्टि हुई है। मेरे मन में संतोष था। मै महेंद्रू में करीब दो साल रहा और मीनू के बदन को रौदता रहा। सच बोलू तो दस साल हो गये। उसके साथ किये गये चुदाई को मैं आज तक नहीं •ाूला।

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